
ध्यान (MEDITATION)
ध्यान क्या है ? ध्यान बस एक अवस्ठा है|
इस प्रश्न का उत्तर कि ध्यान कैसे किया कैसे जाए | केवल इतना है कि आपको करना नहीं कुछ भी यह स्वतः होता है जैसे जीवन की अन्य अवस्ठायें हैं यह भी एक अवस्ठा है.यह अन्य अवास्ठाओं की तरह जीवन मैं आता है .जब आप संपूर्ण किन्तु, परन्तु आशा ,निराशा,भय, शोक के विपरीत ओर चल पड़ते हैं| ध्यान में आप एक खाली पात्र की तरह हो जाते हैं |जिसमें किसी भी वस्तु का स्वागत है कोई संशय, क्रोध, भय है ही नहीं |या यूँ कहिये ध्यान एक अबोध बालक सी अवस्ठा है, जिसमें आपको किसी से द्वेश ,राग ,कष्ट या अपमान की अनुभूति पहले से नहीं हो सकती आप स्वागत करते हैं एक अछे मेज़बान की तरह ध्यानावस्था रूपी मेहमान का|.उसे जो चाहिये बिना संशय देते हैं| आप एक अबोध बनने का अभ्यास करते रहिये और आनंद अनुभव होने पर उसे ध्यान मान लीजिये|
बालक को देखकर आप बालक सा अनुभा करने लगें तो आप ध्यानी हो सकते हैं|एक कोमल मन जिसमें शिशुता हो वही ध्यानी है |देखिये कभी ध्यान से एक नवजात को वह ध्यान्वास्ठा मैं ही है |अब आप सोच लीजिये की कैसे संभव है यह .....
यहीे से आप जान जायेंगे कि शिशु बने रहकर भी सब करते रहना ही ध्यान है |
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