प्रेम | प्रेम एक सहज समाधी है

                                  

                      प्रेम

 

 

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प्रेम एक सहज समाधी है
व्यक्ति जब प्रेम में होता है
तो मग्न होता है विलीन होता है
आँखे बंद किये बगैर और ध्यान की मुद्रा बनाये बिना ही वह
खुली आँखों से
समाधी का आनंद लेता है अपने प्रियतम को हर वक्त निहारता है
उसे इस सहज समाधी मैं दुर्लभ अनुभूति होती है
आवश्यकता नहीं की उसे किसी के आलिंगन  या स्पर्श की हो
वह पूर्णतया संत्राप्त है बिना उसे सामने रखे भी दर्शन करना ही सहज समाधी
अगर आप इश्वर भक्ति की इस पराकाष्ठा पर हैं तो आप प्रेम मैं हैं
और अगर आप प्रेम मैं इस बिंदु पर हैं तो आप भक्ति की पराकाष्ठा पर हैं

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